शिल्प संचार में विशेषज्ञता के साथ शिल्प और डिजाइन में M.Des

संचार मानव मन का एक मौलिक प्रयास है। अग्नि की खोज से लेकर कृषि तक, मानव संचार साधनों के उपयोग की मदद से विकसित हुआ है, ताकि अगली पीढ़ी तक वे अपने ज्ञान का पहुंचा सकें। वास्तव में, समस्त मानव प्रगति और विकास केवल मनुष्यों की पिछली पीढ़ियों द्वारा छोड़े गए अभिलेखों, पुरालेखों और उनसे पुनःप्राप्त जानकारी और ज्ञान के के माध्यम से ही संभव हुआ है।

संचार और शिल्प का गहरा संबंध है - दोनों के बीच का संबंध उतना ही जटिल है, जितनी की कोई हस्तनिर्मित वस्तु। सभी शिल्प, चाहे तीखे या कुंद, पारभासी या अपारदर्शी, कठोर या नरम - देखने वाले में भावनाओं का संचार करते हैं - वे वस्तु की कार्यात्मकता के संबंध में संकेत देते हैं। जहां कुछ शिल्प स्वरूप से कथात्मक होते हैं और अधिक स्पष्टता से संवाद करते हैं, दूसरों की पुनर्रचना अधिक गूढ़ होती है।

संचार/कम्यूनिकेशन डिज़ाइन का उपयोग प्रभावी रूप से किसी शिल्प के दस्तावेज़ीकरण (प्रदर्शनी डिज़ाइन), विश्लेषण (डिज़ाइन के बारे में सोच), कहानी कहने (प्रकाशन डिज़ाइन), प्रचार करने (ब्रांडिंग), बेचने (सोशल मीडिया और ई-कॉमर्स) और संरक्षित करने (पैकेज डिज़ाइन) के लिए किया जा सकता है।

हम बड़े पैमाने पर बदलते रहने वाले और अभूतपूर्व अनिश्चितता के दौर में रहते हैं। हस्तनिर्मित उत्पादों के महत्व के बावजूद, यह मशीनीकरण और तकनीकी विकास के कारण खतरे में हैं। इसे विचारों में भिन्नता के रूप में देखने के बजाय, क्राफ्ट कम्युनिकेशन कोर्स को हमारे समाज के इन विपरीत प्रतीत होने वाले पहलुओं के बीच समय पर जुड़ाव प्रदान करने के रूप में देखा जा सकता है। यह शिल्प की भूमिका पर पुनर्विचार करने का एक अवसर है, जो हमारे डिज़ाइन और प्रौद्योगिकी-संचालित जीवन में कुछ अधिक अंतर्निहित है।

प्रासंगिकता

आईआईसीडी के शिल्प संचार कार्यक्रम में एक छात्र न केवल शिल्पकार की जरूरतों के प्रति संवेदनशील होगा, बल्कि वे प्रयोग, अनुसंधान और खोज के लिए एक जुनून भी विकसित करेंगे। वे कठिन सवाल पूछने, नए तरह के निष्कर्ष निकालने या यहां तक कि असफल होने से भी नहीं डरेंगे। इस कार्यक्रम में संवाद, चर्चा, चिंतन, परिकल्पना पर जोर दिया जाएगा, जो आलोचनात्मक और स्वतंत्र विचार संबंधी दृष्टिकोण को विकसित करने के लिए आवश्यक है।

शिल्प और डिज़ाइन में मास्टर डिग्री (शिल्प संचार में विशेषज्ञता के साथ)

इस पाठ्यक्रम का उद्देश्य पूर्ण रूप से विकसित और परिपक्व डिज़ाइन पेशेवरों को तैयार करना है, जो शिल्प के मूल्यों और क्षमता के प्रति संवेदनशील हों। वे उन संभावनाओं के बारे में जानते हैं, जो डिज़ाइन और प्रौद्योगिकी एक शिल्प में ला सकते हैं। इसके विपरीत, वे यह पुनर्विचार करने में भी सक्षम हैं कि शिल्प डिज़ाइन को कैसे प्रभावित कर सकता है।

कार्यक्रम डिज़ाइन छात्रों और शिल्पकारों के बीच आदान-प्रदान के अवसर प्रदान करेगा, साथ ही उनकी सामग्री संस्कृति, रीति और रिवाजों, पौराणिक कथाओं और विवरण का भी। छात्रों को मुख्य संचार डिज़ाइन कौशल में एक मजबूत ग्राउंडिंग प्राप्त होती है।

हमारे छात्रों में ऐसे कौशल होंगे जिनमें शामिल हैंः

  • दृश्य संचार में विशेषज्ञता - रणनीतिक बनना, विवेकशील बनना, सारभूत होना, और विषय वस्तु का संश्लेषण, तुलना और अंतर करना। वे कच्चे आंकड़ों को एक अच्छी तरह से पैक किए गए, समझने में आसान रूप में प्रभावी तरीके से रूपांतरित करने में सक्षम होते हैं; यह किसी पुस्तक, प्रस्तुति या वेबसाइट के रूप में हो सकता है।
  • मानवीय और सहानुभूति-आधारित कौशल और इस क्षेत्र के लिए आवश्यक विविध पृष्ठभूमि के लोगों के साथ काम करने की क्षमता।
  • शिल्प की भौतिकता और कार्यात्मकता की एक मजबूत समझ - अतीत, वर्तमान और भविष्य की।
परिणाम
छात्र इन क्षेत्रों में काम कर सकेंगेः

दस्तावेज़ीकरणः शिल्प दस्तावेज़ों का निर्माण, दोनों शिल्पकारों के लिए और जनता के लिए, ऑनलाइन संसाधन के रूप में उपलब्ध।

आर्टिक्यूलेशनःशिल्प दस्तावेजों को अनपैक करना और धन जुटाने, प्रक्रिया की, शिल्पकारों की दुर्दशा की व्याख्या करने के साथ-साथ शिल्पकारों के अधिकारों की वकालत के लिए प्रभावी प्रस्तुतिकरण बनाना।

संग्रहण और प्रदर्शित करनाः प्रदर्शनियों की कल्पना करने और उनका आयोजन करने में सक्षम और विभिन्न प्रकार के वर्णन और तुलना करने में सक्षम, जो शिल्प सामग्री, उसके उपयोग, या संबंधित कौशल में बदलाव के संदर्भ में एक शिल्प या समुदाय के प्रमुख पहलुओं को उजागर करते हों।

शोधः शिल्प समूहों पर मात्रात्मक और गुणात्मक अनुसंधान के माध्यम से और शिल्पकारों को बदलते बाजार की जरूरतों, कौशल-वर्गों और उपलब्ध संसाधनों से अवगत कराना, जिससे की इन चुनौतियों का समाधान करने के लिए शिल्प में किए जाने वाले परिवर्तनों पर वे कार्य कर सकें।

प्रचारः शिल्पकारों और संगठनों को बढ़ावा देने के लिए ब्रांडिंग, वेबसाइट, सोशल मीडिया का उपयोग किया जाता है।

मार्केटिंगः शिल्प को बढ़ावा देने के लिए इन्फोग्राफिक्स, ब्रांडिंग, वेबसाइट डिज़ाइन और सोशल मीडिया रणनीतियों का उपयोग। उत्पादों का सुरक्षित रूप से संग्रहण और परिवहन करने के लिए पैकेज डिज़ाइन।

प्रभाव और नवाचारःशिल्प का नवीनीकरण करने के लिए डिजिटल तकनीक के साथ संचार डिज़ाइन उपकरणों और उत्पादों की खोज। उदाहरण में कला और डिज़ाइन का निर्माण करने के लिए शिल्प से बने टाइपफेस शामिल हैं, जो नए उपयोगकर्ताओं को कारीगर तक पहुंचाते हैं।

सहानुभूति और सशक्तीकरणः छात्रों की भूमिका और जिम्मेदारी न केवल सीखने तक की ही है, बल्कि शिल्प पर पुनर्विचार करने के लिए ड़िजाइन के बारे में सोच और कार्य पद्धति का ज्ञान शिल्पकारों को वापस देने की है।

शिल्प संचार में स्नातक करने वाले छात्रों के लिए कैरियर की संभावनाएं

डिज़ाइन सेक्टरःडिज़ाइन स्टूडियो, संस्थाओं के इन-हाउस डिज़ाइन सेट-अप या फ्रीलांस डिज़ाइनर के रूप में।

शिल्प क्षेत्रः एनजीओ/गैर सरकारी संस्थाओं, शिल्प संगठनों, या शिल्प प्रभाव पर ध्यान केंद्रित करने के लिए सीएसआर कार्यक्रमों से जोड़ने के लिए।

सांस्कृतिक और ज्ञान उद्योगः संग्रहालयों और संस्थानों, अभिलेखागार, शैक्षिक अनुसंधान, लेखन, शिक्षा, आदि क्षेत्रों में क्यूरेटर।

विकासात्मक क्षेत्रः सरकारी और अंतर्राष्ट्रीय संगठन जैसे यूनेस्को; गैर-सरकारी संगठन और विकास संबंधित प्रभावों की बुनियाद डालने में।

कल्चरल एंटरप्रेन्योर/सांस्कृतिक उद्यमीः स्नातक डिज़ाइनर-कारीगर के रूप में भी काम कर सकते हैं, जिनके पास न केवल एक शिल्पकार के समान हाथ का कौशल है, बल्कि कहानी कहने के लिए नए तरीके बनाने और अपने ब्रांड को नए दर्शकों तक ले जाने के लिए संचार डिज़ाइनरों के रूप में साधन है।

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