फैशन डिज़ाइन (एफडी)

फैशन डिज़ाइन (एफडी)

‘‘हाल के समय में, हमने देखा है कि लक्जरी ब्रांड अपने ब्रांड को विशिष्ट और हटकर बनाने के लिए अपनी विरासत और शिल्प कौशल की तरफ लौट रहे हैं।” आज बहुत से लोग शिल्प-आधारित तरीके से काम कर रहे हैं और जो सामग्रियों और प्रक्रियाओं के प्रति समर्पित हैं, पर जरुरी नही की वे पुराने तरीके हों।

लक्ज़री उद्योग के लिए शिल्प अभी भी बहुत महत्वपूर्ण है, लेकिन यह नई तकनीकों और प्रौद्योगिकी के साथ भी अपनी जगह साझा करता है। शिल्प को यदि अपने आपको अतीत की पुरानी यादों से मुक्त करना है, तो शिल्प की परिभाषा पारंपरिक हस्तनिर्मित तकनीकों से परे विकसित होनी चाहिए। श्री ओपेंशॉ ने कहा, “मुझे लगता है कि यह हैंडक्राफ्ट के बारे में कम है, और यह निर्माता के हाथ की छाप छोड़ने के बारे में अधिक है; यह उन वस्तुओं के बारे में है जो किसी चीज़ पर अपनी अनोखी छाप दिखाती हैं, जो की असाधारण लगे।“

“यह परस्पर विरोधी लग सकता है, लेकिन नई तकनीक उत्कृष्ट शिल्प के नए तरीकों को फिर से संभव बनाती है“, यह सुश्री वैन हर्पेन के शब्द हैं, जो एक फैशन डिज़ाइनर हैं, और 3डी पिं्रटिंग और नई तकनीकों का उपयोग करती हैं। “हम कपड़े पर हाथ से कारीगरी करते हैं, क्योंकि इसे तकनीक का उपयोग करके बनाना असंभव है, और हम सभी प्रकार की नई तकनीकों और प्रौद्योगिकी का उपयोग एक ही कारण से करते हैं क्योंकि यह हाथ से करना असंभव होगा।“ भारत में कई फैशन डिज़ाइनिंग संस्थान हैं।

रैशनैल

हमारे देश में विभिन्न फैशन डिज़ाइनिंग संस्थान मौजूद हैं। भारत विपुल शिल्प तकनीकों का केंद्र है, जो प्राचीनकाल से चलन में हैं। यह जीवंत शिल्प परंपराएं उन लोगों के सामाजिक-आर्थिक और सांस्कृतिक जीवन में इस सहजता से घुली मिली हुई हैं, जो इनका प्रयोग करते थे। एक समय में, इनमें से कई मनोरम और नाज़ुक हस्तशिल्प वस्तुओं को विदेशों में लक्जरी उत्पादों के रूप में निर्यात किया गया था। हालाँकि, समय तब बदल गया, जब उपनिवेशवादियों ने उनके औद्योगिक स्तर पर उत्पादित सामानों को बेचने के लिए हमारे शिल्प उद्योग और शिल्पकारों को व्यवस्थित तरीके से नष्ट कर दिया, और बाद में शिल्प क्षेत्र ने गिरावट का अनुभव किया, जब सस्ते और गुणवत्ता के साथ समझौता किए गये उत्पादों की मांग बढ़ी, जिससे की मजबूत शिल्प आधारित अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचा और इससे अधिक महत्वपूर्ण था कि यह उत्तम कारीगरी और एस्थेटिक्स के लिए हानिकारक थे।

दुनिया भर में शिल्पकारी और हस्तनिर्मित कला के पुनरुत्थान के साथ, अच्छी गुणवत्ता और व्यक्तिगत रूप से तैयार किए गए उत्पादों की मांग बढ़ी है। जरूरी नहीं की यह पारंपरिक वस्तुएं हों, बल्कि शिल्प तकनीकों और प्रक्रियाओं के साथ बनाए गए समकालीन उत्पाद हैं। जयपुर में कई फैशन डिज़ाइनिंग कॉलेज हैं, जो फैशन डिज़ाइन कार्यक्रम पढ़ाते हैं। इनका उद्देश्य पारंपरिक शिल्प ज्ञान की गहन समझ और खासियतों का पता लगाना और उनका मूल्य बढ़ाना है और उन्हें नई तकनीकों और सामग्रियों के साथ जोड़ना है, जिससे की वे समकालीन जीवन शैली और फैशन डिज़ाइन के लिए एक प्रेरणादायक संसाधन के रूप में सेवा प्रदान कर सकें। छात्र संस्थान और उसके नेटवर्क और लिंकेज द्वारा उपलब्ध शिल्प सुविधाओं और विशेषज्ञता का पूरी तरह से लाभ उठा सकते हैं। राजस्थान एक शिल्प समृद्ध क्षेत्र है और यहां का अपना एक पारंपरिक समाज है, जो शिल्प, शिल्प प्रथाओं, उनके अनुप्रयोग और क्षमता की प्रामाणिकता को समझने के लिए समृद्ध सांस्कृतिक पृष्ठभूमि और संदर्भ प्रदान करता है। जयपुर में कई सरकारी फैशन डिज़ाइनिंग संस्थान हैं। हालांकि, अनुसंधान और सीखने का दायरा राजस्थान तक ही सीमित नहीं होगा, बल्कि इसका विस्तार देश और विदेश के दूरदराज़ के उन क्षेत्रों में भी होगा जो कला, शिल्प, संस्कृति और विश़्ाूअल एस्थेटिक्स से समृद्ध होंगे।

 
फैशन डिज़ाइनिंग में डिग्री

भारतीय शिल्प संस्थान अंडरग्रेजुएट स्तर पर अपने 4 वर्षीय फैशन डिज़ाइन पाठ्यक्रम की जगह जयपुर में फैशन और टेक्सटाइल डिज़ाइनिंग पाठ्यक्रमों में डिग्री प्रदान करता है। फैशन डिज़ाइन पाठ्यक्रम फैशन अनुप्रयोगों के लिए शिल्प के उपयोग पर ध्यान केंद्रित करते हैं।

जो छात्र आईआईसीडी से फैशन डिज़ाइनिंग में डिग्री प्राप्त करते हैं, वे सामग्रियों के लिए समझ और सरफेस ओरनामेंटेशन के पारंपरिक कौशल को विकसित करने के साथ पैटर्न बनाने, ड्रैपिंग और परिधान निर्माण की तकनीक सीखते हैं। शिल्प और डिज़ाइन के कंसेप्ट, डिजिटल उपकरण, और शिल्प क्षेत्र का अध्ययन इस शिक्षण को और आगे बढ़ाते हैं, जो छात्रों को शिल्प और फैशन की चुनौतीपूर्ण और गतिशील दुनिया का सामना विश्वास के साथ करने में सक्षम बनाते हैं। शिल्प के ज्ञान को गहराई से जानने के लिए कारीगरों के साथ लगातार बातचीत और फील्डवर्क, छात्रों की फैशन डिज़ाइन के बारे में जानकारी को और बढ़ाता है।

ख़ास कर के, आईआईसीडी, जो जयपुर में एक फैशन डिज़ाइनिंग कॉलेज है, वहां से फैशन डिज़ाइनिंग की डिग्री फैशन उद्योग में उज्ज्वल कैरियर की संभावनाओं का एक प्रवेश द्वार है। उदाहरण के लिए, जयपुर में फैशन डिज़ाइनिंग कोर्स में नामांकित छात्रों को डिज़ाइन हाउस, डिज़ाइनरों के साथ फैशन डिज़ाइनर, या निर्यातकों, बड़ी खुदरा कंपनियों के साथ व्यापारियों, आदि के रूप में काम करने का अवसर प्राप्त होता है।

जयपुर में फैशन और टेक्सटाइल डिज़ाइनिंग का कोर्स पूरा करने वाले छात्रों के लिए कैरियर की संभावनाएं
  • डिज़ाइन हाउस और क्राफ्ट सेक्टर के साथ फैशन डिज़ाइनर के रूप में नौकरी करना।
  • निर्यातकों और निर्माताओं के साथ डिज़ाइनरों या व्यापारियों के रूप में काम करना।
  • बड़ी खुदरा कंपनियों में डिज़ाइनरों या व्यापारियों के रूप में काम करना।
  • डिज़ाइनर, फैसिलिटेटर के रूप में एनजीओ के साथ काम करना।
  • फ्रीलांस डिज़ाइनरों के रूप में काम करना।
  • उद्यमियों के रूप में काम करना।

Intake: 25 Seats

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न. क्या फैशन डिज़ाइनिंग का कोर्स करना फलदायी साबित होगा?
कला, शिल्प और फैशन डिज़ाइनिंग पाठ्यक्रम, छात्रों के लिए अवसरों की दुनिया का रास्ता सुनिश्चित करते हैं। फैशन डिज़ाइनिंग का कोर्स करने वाले छात्र को सकारात्मक भविष्य का आश्वासन दिया जा सकता है, जहां उसके पास कैरियर के कई अवसर होंगे।
प्रश्न. आईआईसीडी में फैशन डिज़ाइनिंग की अवधि क्या है?
आईआईसीडी में फैशन डिज़ाइनिंग कोर्स की अवधि चार वर्ष है।
एक फैशन डिज़ाइनर को किन क्षेत्रों में नौकरी मिल सकती है?
एक फैशन डिज़ाइनिंग छात्र को विभिन्न क्षेत्रों में नौकरी मिल सकती है, जिसमें खुदरा कंपनियों, फैशन बुटीक, शिल्प उद्योग या गैर सरकारी संगठनों में फैशन डिज़ाइनर के रूप में नौकरी शामिल है।
क्या हमारे देश में शिल्प उद्योग फल-फूल रहा है?
लोगों ने जटिल कला और शिल्प डिज़ाइनों को पसंद करना और उन्हें सराहना शुरू कर दिया है। लोग पारंपरिक और साथ ही समकालीन डिज़ाइन पसंद करते हैं। हस्तनिर्मित उत्पादों को दुनिया भर में पसंद किया जाता है। भारतीय बाजार में उत्पादों की भारी मांग है।
प्रश्न. फैशन डिज़ाइन प्रोग्राम क्या है?
एक फैशन डिज़ाइन कार्यक्रम में विभिन्न उपकरणों का उपयोग करके विभिन्न डिज़ाइन और पैटर्न बनाने के बारे में ज्ञान प्राप्त किया जाता है।
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