पूर्व छात्र वार्ता

समाज के चैंज एजेंटों के रूप में, आईआईसीडी के पूर्व छात्र भारत और विदेश, दोनों स्थानों पर, कई कार्य स्थितियों में अपने मूल्य जोड़ रहे हैं। 500 से अधिक पूर्व छात्र संबंधित उद्योगों के साथ निर्णायक पदों पर काम कर रहे हैं और शिल्प उद्योग के भविष्य को आकार देने में सहायक हैं।

आईआईसीडी के पूर्व छात्र सक्रिय रूप से अपने ज्ञान को जमीनी स्तर पर ले जा रहे हैं, और देश की शिल्प कला को आगे बढ़ाने की दिशा में काम कर रहे हैं। आईआईसीडी ने हमेशा अपने इस संसाधन को महत्व दिया है और संस्थान को भविष्य की दिशा में ले जाने में पूर्व छात्रों को शामिल किया है। कई पूर्व छात्रों ने अपने स्टूडियो, और सामाजिक उद्यम स्थापित किए हैं, जो उद्यमशील गतिशीलता के क्षेत्र में उत्कृष्ट स्थानों पर हैं। उनमें से कुछ हैंः - स्टूडियो असाओ, केएएसएसए, स्टूडियो सास्वता, डी-क्यूब, आवरण, ओजस, इरो इरो, स्टूडियो त्राटक, स्टूडियो फोर्ज, धरन, धीरज छीपा, एक नाम, केया और निधि, कबिश, आदि। कई पूर्व छात्र संकाय और अनुसंधान सहयोगियों के रूप में देश भर में विभिन्न डिज़ाइन स्कूलों से जुड़े हुए हैं। उन्हें भारत और विदेशों में उच्च अध्ययन के लिए प्रतिष्ठित संस्थानों में भी प्रवेश दिया जा रहा है।

स्वाति जांगिड़, (बैच 2010-13)

वह लेबल कस्तूरी की संस्थापक हैं, एवं आईआईसीडी, जयपुर की पूर्व छात्रा हैं। अपनी पहचान पर खरे उतरते हुए, आईआईसीडी ने स्वाति को सॉफ्ट मटिरीअल की तकनीकी और डिज़ाइन की भली प्रकार जानकारी दी, जो की स्वदेशी रचनाओं और रचनाकारों, शिल्प और शिल्पकार के लिए शुद्ध प्रेम और गहन देखभाल के साथ नाजुक और भावनात्मक रूप से संतुलित है। कस्तूरी का जन्म उनकी मूल प्रेरणा और विचारधारा के साथ पूरी तरह से प्रतिध्वनित होता है। कस्तूरी पारंपरिक भारतीय हस्तशिल्प की कई अलग-अलग तकनीकों के साथ काम करता है, जैसे कि हैंडलूम बुनाई (दरी बुनाई, टंगलिया बुनाई, पछेडी बुनाई), हैंड ब्लॉक पिं्रटिंग (अजरख) और गुजरात, भारत के कच्छ और सौराष्ट्र क्षेत्र की टाई एंड डाई। कस्तूरी आपके घर और आपके लिए डिज़ाइन करती है और उसके प्रत्येक उत्पाद पर्यावरण, सामाजिक, सांस्कृतिक और आर्थिक संपोषण के लिए एक असम्बद्ध सरोकार के साथ एक समावेशी सततता के सिद्धांत को मजबूत करते हैं। यह इस ग्रह और इसके सभी बच्चों के लिए एक महान सौभाग्य है कि हमारे युवाओं को इस तरह की सहानुभूति और इस तरह की देखभाल करने का आर्शीवाद प्राप्त है; हमारे युवा जागरूक हैं और वे सुरक्षा और संरक्षण को महत्व देते हैं; वे सभी के साझा अस्तित्व को महत्व देते हैं।


धीरज छीपा, (बैच 2011-15)

वह बगरू से नई पीढ़ी के क्राफ्ट डिज़ाइनर हैं। उन्हें ब्लॉक पिं्रटिंग के लिए अपना लगाव अपने परिवार से विरासत में मिला है, जो चार से अधिक पीढ़ियों से शिल्प का अभ्यास कर रहा है। आईआईसीडी में सॉफ्ट मटिरीअल एप्लिकेशन में अपनी शिक्षा के दौरान उनके जुनून को नई परिभाषाएं और नए आयाम मिले और उन्होंने डिज़ाइन और एस्थेटिक्स के सिद्धांतों के साथ, सस्टेनेबल रचनात्मकता और उपयोगिता के साथ और नए बाजार दर्शन और जरूरतों के साथ खुद को संरेखित किया। 2015 में पास आउट होने के बाद, धीरज ने अपने लहज़े में उद्देश्यपूर्ण प्रयोगों और नवाचार के साथ इस नए शिक्षण को उम्र के साथ पक चुके शिल्प पर लागू करने का फैसला किया और अपना लेबल, ‘धीरज छीपा’ लॉन्च किया। प्राकृतिक रंगों में उनकी गहरी रुचि और पारंपरिक डिज़ाइनों और तकनीकों के पुनरुत्थान के लिए अपार देखभाल उनकी ताकत बन गई। उन्होंने ‘फडत छपाई’ के लिए एक प्रबल लगाव विकसित किया, वह शिल्प जो लुप्त होता जा रहा है, जिसमें उनका परिवार काम कर रहा था और लगभग 50 साल पहले जिसे छोड़ दिया, और इसे एक नए जोश के साथ उन्होंने फिर से शुरू किया।

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