निदेशक का संदेश

“भारतीय शिल्प संस्थान (आईआईसीडी) एक अनूठा संस्थान है, क्योंकि यह भारतीय शिल्प के बारे में समझ, इसके प्रचार, डिज़ाइन विकास, डिज़ाइन हस्तक्षेप, विपणन हस्तक्षेप और इसकी स्थिरता/सतत्ता पर ध्यान केंद्रित करता है। आज की दुनिया में जहां वैश्वीकरण और बड़े पैमाने पर उपभोग जैसे प्रचलित शब्दों का चलन हैं, शिल्प क्षेत्र उचित सहयोग के बिना विलुप्त होने के ख़तरे का सामना कर रहा है। भारत अपनी हस्तशिल्प परंपराओं में समृद्ध है। आईआईसीडी उन पाठ्यक्रमों को पढ़ाता है, जो देश में प्रचलित विभिन्न शिल्पों को लक्षित करते हैं। ”

इनमें कपड़ा, चमड़ा और काग़ज़ में सॉफ्ट मटिरीयल डिज़ाइन; लकड़ी, धातु और पत्थर में हार्ड मटिरीयल डिज़ाइन; मिट्टी के बर्तनों, सिरेमिक्स और कांच में फायर्ड मटिरीयल डिज़ाइन और फैशन डिज़ाइन शामिल हैं। यह महत्वाकांक्षी डिज़ाइनरों के लिए शिल्प और डिज़ाइन का एक समग्र दृष्टिकोण प्रस्तुत करता है, जिसमें डिज़ाइन पर एस्थेटिक्स/सौंदर्यशास्त्र और कार्यक्षमता के संतुलित मिश्रण के रूप में ध्यान केंद्रित किया जाता है।

19वीं शताब्दी के ‘आर्ट एंड क्राफ्ट मूवमेंट’ की तरह, जिसने सामान्यतः बड़े पैमाने पर होने वाले उत्पादन को अस्वीकार कर दिया गया था और हाथ से तैयार किए गये उत्पादों के विशिष्ट गुणों पर ध्यान केंद्रित किया था, भारतीय शिल्प संस्थान अपने छात्रों में शिल्पकारिता की गुणवत्ता, डिज़ाइन और विशिष्टता के लिए लगाव को विकसित करता है। छात्र उन विभिन्न मंचों से लाभ प्राप्त करते हैं, जो आईआईसीडीउन्हें प्रदान करता है। पारस्परिक लाभ के लिए अंतरराष्ट्रीय विनिमय, कुशल शिल्पकारों और प्रख्यात विशेषज्ञों के साथ संवाद, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कार्यशालाओं और सेमिनारों/गोष्ठियों में भागीदारी, प्रतिष्ठित समारोहों और प्रदर्शनियों में प्रतिनिधित्व और एक रचनात्मक वातावरण, एक ऐसा माहौल बनाते हैं जो समानुभूतिक इंटरेक्टिव लर्निंग को बढ़ावा देता है। नवंबर 2017 में, आईआईसीडी ने अपना पहला अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया था, जो की शिल्प और डिज़ाइन क्षेत्र में हाल के रुझानों/ट्रेंड्स और सतत्ता पर आधारित था और इसका उद्देश्य शोधकर्ताओं की इस क्षेत्र में दृश्यता को बढ़ावा देना था। 2019 नवंबर में, हमने इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के दूसरे संस्करण की सफलतापूर्वक मेजबानी की।

सतत्ता के गांधीवादी आदर्शों के प्रति हमारा समर्पण, प्रकृति के साथ एक सौहार्दपूर्ण सह-अस्तित्व के लिए सहानुभूतिपुर्ण वचनबद्धत्ता और भारतीय हस्तशिल्प समुदाय के उत्थान के लिए हमारी प्रतिबद्धता गाँधी प्रदर्शनी में कार्यान्वित हो सकी, जो राष्ट्रपिता की 150वीं वर्षगाँठ के उपलक्ष्य में आईआईसीडी द्वारा जेकेके में आयोजित की गई थी। नवंबर 2019 में आयोजित सातवें दीक्षांत समारोह में आईआईसीडी ने अपने स्नातक छात्रों के नये बैच के लाभदायक भविष्य के लिए भी कामना करी। इस समारोह को राजस्थान के माननीय मुख्यमंत्री, श्री अशोक गहलोत जी ने अपनी उपस्थिति से अनुग्रहित किया।आईआईसीडी की स्थापना के 25वें वर्ष में, मैं सभी उत्साही महत्वाकांक्षी डिज़ाइनरों को इस पारिस्थितिकी तंत्र का हिस्सा बनने के लिए आमंत्रित करती हूं, जिसका सार जिम्मेदारपूर्ण डिज़ाइन, सतत् शिल्पकारिता और सामुदायिक जागरूकता को प्रोत्साहित करना है।


डॉ.तूलिका गुप्ता

निदेशक, आईआईसीडी

Pay Fee